EV में लगने वाली आग से ऐसे बचें
पिछले 5 दिनों में 4 ऐसे मामले रिपोर्ट किए गए हैं जिनमें दोपहिया Electric Vehicle में आग लगी है। इनमें OLA, Okinawa और Pure EV जैसी कंपनियों के इलेक्ट्रिक स्कूटर शामिल हैं।
इन घटनाओं में सुरक्षा पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। इलेक्ट्रिक व्हीकल लीथियम-आयन बैटरी (Li-ion Battery) से चलते हैं, जिनका इस्तेमाल मोबाइल, लैपटॉप, स्मार्टवॉच आदि में भी होता है।
यह बेहद हल्की और अधिक इफेक्टिव तो हैं, लेकिन इनमें रिस्क भी बहुत अधिक है।
क्या है Li-ion Battery?
लीथियम-आयन बैटरी सबसे अधिक लोकप्रिय बैटरी है, जिसके लोगों के इस्तेमाल में आने वाले लाखों इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को ऊर्जा मिलती है।
एक लीथियम-आयन बैटरी में एनोड, कैथोड, सेपरेटर, इलेक्ट्रोलाइट और दो करंट कलेक्टर होते हैं। एनोड और कैथोड में लीथियम स्टोर होता है, जबकि इलेक्ट्रोलाइट में सेपेरेटर के जरिए एनोड से कैथोड में चार्ज हुए आयन को एनोड से कैथोड और कैथोड से एनोड में ले जाते हैं।
क्यों खास है Li-ion Battery?
यह बैटरियां बहुत हल्की होती हैं, यह इनकी सबसे बड़ी खासियत है। वहीं दूसरी ओर इन बैटरियों में अधिक ऊर्जा इकट्ठा हो सकती है।
लीथियम-आयन बैटरी आमतौर पर 150 वॉट-आवर प्रति किलो ऊर्जा स्टोर कर सकती है, जबकि एसिड वाली लेड बैटरी सिर्फ 25 वॉट-आवर प्रति किलो ऊर्जा स्टोर कर सकती है। ऐसे में इस बैटरी का इस्तेमाल प्रोडक्ट को हल्का भी करता है और बैटरी देर तक चलती है।
यानी इलेक्ट्रिक स्कूटर हो, लैपटॉप हो या आपका मोबाइल हो, वह अधिक देर तक चलता रहेगा।
क्या होता है बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम?
एक बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम यानी BMS एक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम है, जो लीथियम-आयन बैटरी पैक में हर सेल से जुड़ा हुआ रहता है। यह लगातार उनके वोल्टेज और उनसे गुजरने वाले करंट को चेक करता रहता है।
इसमें तापमान को मापने के सेंसर भी लगे होते हैं। इन तमाम डेटा से BMS को बैटरी के चार्जिंग, डिस्चार्जिंग, बैटरी की उम्र और उसकी क्षमता का पता लगाने में मदद मिलती है।
इसलिए लग जाती है Li-ion battery में आग
अभी इन बैटरियों में आग लगने की सटीक वजह कोई भी कंपनी नहीं बता पा रही है। हालांकि, ओकिनावा ईवी का कहना है कि इसकी एक बड़ी वजह शॉर्ट सर्किट हो सकती है, जो व्हीकल को चार्जिंग में की गई लापरवाही का नतीजा हो सकता है।
इसके अलावा विशेषज्ञों का मानना है कि मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट, बाहर से हुआ कोई डैमेज, बैटरी लगाने में फॉल्ट आदि के चलते भी आग लगने का रिस्क रहता है।
लीथियम-आयन बैटरियां वैसे तो अधिक तापमान में भी अच्छे से काम करती हैं, लेकिन तापमान बहुत ही ज्यादा हो जाता है (90-100 डिग्री) तो आग लगने की संभावना बढ़ जाती है।
वहीं बैटरी पैक में बहुत सारी बैटरियां होती हैं, जिन्हें काफी नजदीक-नजदीक लगाया जाता है। ऐसे में अगर किसी गड़बड़ के चलते एक बैटरी में भी शॉर्ट सर्किट होता है तो बाकी की बैटरियों को भी आग लगने में ज्यादा देरी नहीं लगेगी।
क्या है इस तरह की घटनाओं से बचाव का तरीक़ा?
अगर गाड़ी में मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट है तब तो आप कुछ नहीं कर सकते, लेकिन कई तरीकों से आप आग लगने के रिस्क को कम कर सकते हैं।
सबसे पहली बात जो ध्यान में रखनी चाहिए कि गाड़ी को बहुत अधिक गर्म ना होने दें। गर्मी के दिनों में उसे तेज धूप में देर तक ना छोड़ें।
अगर गाड़ी का एक्सिडेंट हो जाता है कि उसके बाद भी बैटरी में कोई नुकसान हो सकता है। ऐसे में एक्सिडेंट के बाद गाड़ी की बैटरी जरूर चेक कराएं, ताकि ये पता चल सके कि उसमें कोई फॉल्ट तो नहीं हुआ।
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