Bucha नरसंहार के बाद UNHRC से बाहर हुआ Russia 

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Ukraine के बुचा शहर (Ukraine’s Bucha) में रूसी सैनिकों की बर्बरता सामने आने के बाद Russia को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) से निलंबित करने का प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में पास हो गया है. 93 देशों ने इस प्रस्ताव के पक्ष वोट किया, जबकि 24 देश इसके खिलाफ रहे.

वहीं, 58 देशों ने वोटिंग से दूरी बनाए रखी और इसमें भारत भी शामिल है. बता दें कि नई दिल्ली ने अब तक इस मुद्दे पर तटस्थ रुख अपनाए रखा है. उसने पहले भी UN में हुईं वोटिंग से परहेज किया था.

Bucha शहर का नरसंहार 

यूक्रेन की राजधानी कीव से करीब 46 किलोमीटर दूर बूचा शहर में इस नरसंहार की कहानी शुरू हुई। यूक्रेनी सेना को यहां पर एक साथ 410 लाशें मिलीं।

ये लाशें काफी पुरानी हो चुकी थीं। कुछ सड़ने भी लगी थीं, तो कईयों के हाथ बंधे हुए थे। दावा है कि, इन लोगों को यातनाएं देने के बाद बहुत पास से गोली मार दी गई। कई लाशों के पैरों, माथे और सीने पर गोली के निशान भी मिले हैं।

यूक्रेनी मीडिया के हवाले से आ रही खबरों के मुताबिक, यहां लाशें अब तक बरामद हो रही हैं। 

तबाही के 40 दिन 

रूस ने यूक्रेन पर 24 फरवरी को हमला किया था। इसके बाद कीव पर कब्जा करने के लिए रूसी सेना सबसे पहले बूचा ही पहुंची थी।

बूचा से कुछ किलोमीटर दूर होस्टोमेल हवाई अड्डे से उतरकर वे बख्तरबंद वाहनों से शहर में दाखिल हुए थे। इसके बाद टैंकों और बख्तरबंद वाहनों के जरिए वे कीव की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन यहां यूक्रेनी सेना ने उनका कड़ा मुकाबला किया और रूसी सैनिकों को बूचा में ही रोक दिया।

तब से रूसी सैनिकों ने बूचा को ही अपना ठिकाना बना लिया और इसे कब्जे में लेकर कथित नरसंहार किया। 30 मार्च को इस शहर को रूसी सैनिकों ने पूरी तरह खाली कर दिया था। पूरे 40 दिन बाद यूक्रेनी सैनिक इस शहर में पहुंचे।

Russia के चेचेन सैनिकों का नाम आया सामने 

सबसे पहले ये जान लें कि रूसी सेना के चेचेन सैनिक सबसे ज्यादा खूंखार माने जाते हैं। किसी को मौत के घाट उतारने में ये सैनिक जिनती वीभत्सता दिखाते हैं, उतनी शायद कोई नहीं।

जब कीव, रूस के कब्जे से बाहर निकलता जा रहा था, तो पुतिन ने यहां पर चेचेन सैनिकों को भेजने की योजना बनाई। इसी योजना के तहत ये सैनिक बूचा में दाखिल हुए।

हालांकि, यूक्रेनी सेना के कड़े प्रतिरोध के चलते इनके कई सैनिकों को जान गंवानी पड़ी और इन्होंने बूचा को अपने कब्जे में ले लिया। अब आरोप लगाए जा रहे हैं कि, जो भी नरसंहार हुआ उसमें रूस के चेचेन सैनिकों का ही हाथ है। 

कूटनीति से मिलेगा Russia-Ukraine war का विकल्प 

भारत (India) ने Russia को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) से बाहर करने के लिए हुई वोटिंग में भाग नहीं लेने पर अपना पक्ष रखा है.

संयुक्‍त राष्‍ट्र में भारत के दूत टीएस त्रिमूर्ति (Indian Envoy to the United Nations TS Tirumurti) ने इस मुद्दे पर कहा, ‘हम बिगड़ रहे हालात को लेकर बेहद चिंतित है और सभी तरह की शत्रुता को खत्‍म के अपने आह्वान को दोहराते हैं.

जब निर्दोष मानव जीवन दांव पर लगा हो तो कूटनीति को एकमात्र व्‍यवहार्य विकल्‍प के रूप में माना जाना चाहिए’.

भारत ने किया हिंसा का विरोध 

अपने फैसले के कारण पर प्रकाश डालते हुए भारत ने कहा है कि यूक्रेन में संघर्ष की शुरुआत से ही हम शांति, संवाद और कूटनीतिक रास्‍ते से मामले के समाधान के पक्ष में खड़े रहे हैं.

भारत का साफ तौर पर मानना है कि खून बहाकर और निर्दोष लोगों की कीमत पर कोई समाधान नहीं निकाला जा सकता है. यदि भारत को कोई पक्ष चुनना है तो वह पक्ष शांति के लिए और हिंसा को तत्‍काल समाप्‍त करने के लिए हैं.

भारत पिछले महीने भी voting का हिस्सा नहीं था 

यूक्रेन संकट को लेकर भारत ने अब तक तटस्‍थ रुख अख्तियार किया है. नई दिल्ली की तरफ से कई मौकों पर कहा गया है कि भारत शांति के पक्ष में है और उम्‍मीद करता हैं कि बातचीत के जरिए सभी समस्‍याओं का समाधान तलाशा जाएगा.

बता दें कि पिछले माह भी संयुक्त राष्ट्र महासभा ने यूक्रेन के खिलाफ रूस के हमले की कड़ी निंदा करने वाला प्रस्ताव पारित किया था. भारत ने इस प्रस्ताव पर मतदान में भाग नहीं लिया था.

UN में भारत ने दिया बड़ा बयान 

हालांकि, इस सप्ताह की शुरुआत में, भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अपना अब तक का सबसे कड़ा बयान जारी करते हुए यूक्रेन के बुचा में आम नागरिकों की हत्याओं (Civilian Killings in Ukraine’s Bucha) की निंदा की और एक स्वतंत्र जांच के आह्वान का समर्थन किया था.

भारत ने कहा था कि बुचा को लेकर सामने आई रिपोर्ट परेशान करने वाली हैं. हम इन हत्याओं की स्पष्ट रूप से निंदा करते हैं और एक स्वतंत्र जांच के आह्वान का समर्थन करते हैं. गौरतलब है कि इससे पहले UNHRC से किसी सदस्य देश को 2011 में निलंबित किया गया था.

क्या है UNHRC

United Nations Human Rights Council की स्थापना सन 1950 में की गई थी जब दूसरा विश्व युद्ध हुआ था तो इस दूसरे विश्व के बाद इस आयोग की स्थापना की गई थी.

दूसरे विश्व युद्ध के बाद शरणार्थियों की हालत खराब थी इसी बात को ध्यान में रखते हुए संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार आयोग की स्थापना की गई जिसके जरिए शरणार्थियों की मदद की गई थी उस वक्त इसका नाम यूनाइटेड नेशन हाई कमीशन रिफ्यूजीस कहां गया था यह यूनाइटेड नेशन की एक ब्रांच है।

UNHRC के बारे में दोबारा एक प्रस्ताव पारित किया गया जिसके अंतर्गत मार्च सन 2006 को इस की पुनः स्थापना की गई।

इसके चुनाव के लिए 47 सदस्य देशों को चुना गया हर देश का एक प्रतिनिधि इस में 3 साल तक कार्य करता है और जो प्रतिनिधि इस में सफल होता है उसे इस परिषद का सदस्य मान लिया जाता है और वह सदस्य ह्यूमन राइट्स के साथ काम करने के योग्य हो जाता है इसकी शुरुआत सभी देशों के मानवाधिकार हितों के लिए की गई है।

UNHRC का हेड ऑफिस स्विजरलैंड के एक शहर जिनेवा में है। संयुक्त राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के तहत सारे देशों के मानव अधिकारों की रक्षा की जाती है इसके अलावा जो इसके स्थाई या अस्थाई सदस्य हैं उन देशों में इसके ऑफिस होते हैं जो मानव अधिकारों की रक्षा करने का कार्य करते हैं।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के कार्य

अगर किसी सदस्य देशों में कोई मानवाधिकार का उल्लंघन होता है तो यह परिषद ने लिखित कार्य करती है

  1. अभिव्यक्ति क स्वतंत्रता को बचाए रखने का कार्य करती है।
  2. इसके तहत किसी भी धर्म को अपने धार्मिक कार्य करने का अधिकार देती है।
  3. यह किसी भी धर्म को उस में विश्वास रखने का अधिकार देती है।
  4. नस्लीय भेदभाव और जातीय भेदभाव को मिटाने का कार्य करती है।
  5. खास तौर पर महिला मानवाधिकारों की रक्षा करना।

और मानवाधिकार से जुड़े हुए जितने भी मुद्दे हैं उन सभी की बारीकी से जांच करके उनको सुचारू रूप से चलाने का कार्य करता है और उसमें सुधार लाने का कार्य करती है।

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