भाजपा कार्यकर्ताओं पर क्यों आग बबूला हुए मुख्यमंत्री ?
उत्तर प्रदेश के मुखिया, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब कल झांसी पहुंचे तो भाजपा के जिला अध्यक्ष पर मुख्यमंत्री आग बबूला हो गए|
दरअसल हुआ यह कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हेलीकॉप्टर झांसी में पुलिस लाइन में बने हेलीपैड के पास उतरा तो हेलीपैड के पास उमड़ी भीड़ से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नाराज हो गए।
दरअसल भाजपा के कार्यकर्ता मुख्यमंत्री का दीदार करने के लिए आपस में ही धक्का-मुक्की करने लगे जिसके बाद मुख्यमंत्री अपने कार्यकर्ताओं को गुस्से में अनुशासन में रहने की नसीहत दे दी।
इसी बीच नाराज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिर्फ अनुशासन में रहने वाले और कतार में लगे कार्यकर्ताओं से हाथ मिलाया।
आपको बता दे कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हेलीकॉप्टर शाम 4:00 बजे के आसपास पुलिस लाइन में बनाए गए हेलीपैड पर उतरा मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए स्थानीय प्रतिनिधि और पार्टी कार्यकर्ताओं के अलावा 100 से भी अधिक कार्यकर्ता खड़े थे|
केवल 10 से 15 लोग ही ठीक से कतार में खड़े थे जिसके बाद योगी के पहुंचने पर उनकी धक्का-मुक्की शुरू हो गए इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भड़क गए।
अनुशासन में रहने की दी नसीहत
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यकर्ताओं को अनुशासन में रहने की नसीहत दी नाराज मुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं से मिलने से इंकार कर दिय।
मुख्यमंत्री बे कार्यकर्ताओं को नसीहत देते हुए कहा कि मैं उन्हीं से मिलूंगा जो अनुशासन में है साथ ही यह भी कहा कि मैं उनसे मिलना चाहूंगा जो कतार में खड़े हुए थे इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कतार में खड़े कुछ लोगों से हाथ मिलाया और आगे बढ़ गए|
आपको बता दें कि मुख्यमंत्री के साथ आए प्रदेश सरकार में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने भी भाजपा कार्यकर्ताओं से नाराजगी जाहिर की दोनों ने मिलकर झांसी जिला अध्यक्ष मुकेश मिश्रा को फटकार लगाई और इसी के साथ पूछा यह कैसी व्यवस्था है?
जिसके बाद भाजपा कार्यकर्ता इधर-उधर हो गए।
मुख्यमंत्री ने नहीं लिया गार्ड ऑफ ऑनर
अनुशासन के लिए जाने- जाने वाले भाजपा कार्यकर्ताओं की अनुशासनहीनता पर योगी बेहद नाराज थे। इस बीच उन्होंने गार्ड ऑफ ऑनर भी नहीं लिया।
जबकि इसके लिए पुलिस ने काफी पहले से तैयारियां कर ली थीं। लेकिन, गार्ड ऑफ ऑनर देने वाले पुलिसकर्मियों के आगे भाजपा कार्यकर्ता खड़े हो गए, जिससे मुख्यमंत्री को मजबूरन बिना गार्ड ऑफ ऑनर के आगे बढ़ना पड़ा।
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