जैसलमेर की लोमड़ियों में खाज बनी चिंता की वजह

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 राजस्थान में जैसलमेर ज़िले के झाड़ियों के जंगलों में पाई जाने वाली खाज से पीड़ित रेगिस्तानी लोमड़ियों को स्थानीय लोगों द्वारा देखा गया। जिसके बाद वन्यजीव संरक्षणवादियों ने चिंता व्यक्त की है। 

राजस्थान में की गयी 2019 की वन्यजीव जनगणना के अनुसार, राज्य में 8,331 भारतीय और रेगिस्तानी लोमड़ियों थीं। प्रादेशिक क्षेत्र में 6,715 और संरक्षित क्षेत्रों में 1,616 थे। डेजर्ट नेशनल पार्क (DNP) में 386 और जैसलमेर में इसके बाहर 317 लोमड़ियां थीं।

पहली बार साल 2006 में ऐसा मामला सामने आया था।

भीषण रूप से फैल सकती है खाज

वन्यजीव जीवविज्ञानी सुमित दूकीय के अनूसार वन विभाग को इस स्थिति के बारे में कायी बार अवगत कराया जा चुका है लेकिन उनके इलाज के लिए कुछ नहीं किया गया है। 

यह बीमारी एक से दूसरे में फैलती है और हर साल 8-10 संक्रमित लोमड़ियों  को देख रहे हैं। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि यह बीमारी फैल रही है। उनके अनुमान के अनुसार, यह जैसलमेर ज़िले में  30 प्रतिशत से लोमड़ियों के खाज से ग्रस्त होने की आशंका है।

खुजली पैदा करने वाला परजीवी घुन बालों में रहता है और जलन और खुजली का कारण बनता है।

स्थानीय लोगों ने ऐसे कई रेगिस्तानी लोमड़ियों की त्वचा की स्थिति के साथ तस्वीरें खींची हैं, जिनमें से कुछ के बाल पूरी तरह ग़ायब हो चुके हैं। 

संरक्षणवादियों ने कहा कि अगर संक्रमित लोमड़ियों के इलाज के लिए कोई ज़रूरी कदम नहीं उठाया गया तो यह बीमारी अधिक लोमड़ियों और अन्य जानवरों में फैल सकती है।

वन विभाग का कहना है कि क्षेत्र में ऐसी पाँच से भी कम लोमड़ियाँ हैं

“रेगिस्तानी लोमड़ियों में खाज कोई बड़ी समस्या नहीं है। ये छिटपुट मामले हैं, प्रकोप नहीं। हमने अन्य जिलों में संक्रमित रेगिस्तानी लोमड़ियों को नहीं देखा है।

“जैसलमेर के पोखरण ब्लॉक में मुश्किल से चार या पाँच ही ऐसी लोमड़ियाँ ।हो सकता है किसी खाज ग्रस्त  ऊंट के शव के संपर्क में आई हों, जो संक्रमित हों और यह बीमारी लोमड़ियों भी फैल गई हो, ”DNP में संभागीय वन अधिकारी कपिल चंद्रवाल ने कहा।