अजय सिंह बिष्ट से योगी आदित्यनाथ तक का सफ़र!
भारत में शायद ही ऐसा कभी हुआ हो, जब एक जनता का प्रतिनिधित्व करने वाला शख्स एक संवैधानिक पद पर रहते हुए अपनी धार्मिक गद्दी पर भी विराजमान हो। उत्तराखण्ड (तत्कालीन उत्तर प्रदेश) के पौड़ी गढ़वाल जिले स्थित यमकेश्वर तहसील के पंचुर गांव के एक गढ़वाली क्षत्रिय परिवार में योगी आदित्यनाथ का जन्म हुआ।
इनके पिता का नाम आनन्द सिंह बिष्ट, जो एक फॉरेस्ट रेंजर थे और इनकी मां का नाम सावित्री देवी है। अपनी माता-पिता के सात बच्चों में तीन बड़ी बहनों और एक बड़े भाई के बाद ये पांचवें थे और इनसे और दो छोटे भाई हैं।
उत्तराखंड से आए गोरखपुर
1990 में ग्रैजूएशन के दौरान अजय सिंह बिष्ट ABVP से जुड़े। कोटद्वार में जब उनका सामान चोरी हुआ तब उनके सारे प्रमाण पत्र और संत प्रमाण पत्र भी उसी में चल गए जिसके चलते दोबारा विज्ञान स्नातकोत्तर में प्रवेश लेना पड़ा।
1993 में फिर गणित से एम एस सी की पढ़ाई प्रारम्भ की जिस बीच राम मंदिर आंदोलन से जुड़े और गोरखपुर आ कर बस गए। यहाँ वह महंत अवैदनाथ की शरण में आ गए और दीक्षा ले ली। साल 1994 में अजय सिंह बिष्ट पूर्ण सन्यासी बन गए जिसके बाद उन्हें योगी आदित्यनाथ के नाम से जाना जाने लगा।
2014 में महंत अवैधनाथ के निधन के बाद योगी आदित्यनाथ को महंत बनाया गया।
राजनीति में इस तरह आए
सर्वप्रथम साल 1998 में योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से बीजेपी प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़े और जीत हांसिल की. तब इनकी उम्र 26 साल थी। योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से बारहवीं लोक सभा के सबसे युवा सांसद थे।
साल 1999 में ये गोरखपुर फिर से सांसद चुने गए. 2002 में योगी आदित्यनाथ ने हिन्दू युवा वाहिनी बनायी। साल 2004 में तीसरी बार लोकसभा का चुनाव जीता। साल 2009 में ये 2 लाख से ज्यादा वोटों से जीतकर योगी आदित्यनाथ लोकसभा पहुंचे।
साल 2014 में पांचवी बार एक बार फिर से दो लाख से ज्यादा वोटों से जीतकर ये सांसद चुने गए। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को बहुमत मिला, इसके बाद उत्तर प्रदेश में 12 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए। इसमें योगी आदित्यनाथ भाजपा के स्टार प्रचारक रहे लेकिन परिणाम निराशाजनक रहा।
फ़ायरब्रांड CM बनने का सफ़र
साल 2017 में विधानसभा चुनाव में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने योगी आदित्यनाथ से पूरे राज्य में ज़ोर शोर से प्रचार किया। प्रचार के लिए उन्हें एक हेलीकॉप्टर मुहैया कराया गया था। 19 मार्च 2017 में उत्तर प्रदेश के भाजपा विधायक दल की बैठक में योगी आदित्यनाथ को विधायक दल का नेता चुनकर मुख्यमंत्री बनाया गया.
योगी आदित्यनाथ का प्रभाव उत्तर प्रदेश की राजनीति और जनता पर इस तरह रहा कि 2022 में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री की कुर्सी से जुड़े कई अंधविश्वास तोड़े और उत्तर प्रदेश की राजनीति में पहले ऐसे CM बने जिन्होंने 5 साल पद पर बने रहने के बाद फिर से कमान सँभाली है।